इंसुलिन हिन्दी में।Recombinant Insulin या Humulin हिन्दी में

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इंसुलिन एक पॉलिपेप्टाइड या प्रोटीन हार्मोन है जोकि पैंक्रियास की बीटा कोशिकाओं (𝜷- cells of Pancreas) द्वारा बनाया और वहीं से इसे खून में रिलीज़ किया जाता है।

यह हार्मोन शरीर में रक़्त शर्करा या शुगर की मात्रा को नियंत्रित करता है।

आपने शायद यह शब्द तो ज़रूर सुना होगा कि फला व्यक्ति को शुगर हो गया है या किसी को डायबिटीज हो गई है।

कुछ नहीं तो ये अक़्सर सुनते होंगे कि, कम मीठा खाना चाहिए नहीं तो शुगर हो जाएगी।

लेकिन यह सारी बातें एक ही हार्मोन जिसे हम इंसुलिन कहते हैं उसके शरीर में होने वाले असंतुलन पर ही निर्भर करती हैं।

आज हम लोग इस पोस्ट में इंसुलिन हार्मोन पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

कहां बनता है इंसुलिन हार्मोन? Where is the Insulin synthesize?

इंसुलिन हार्मोन को बनाने वाली कोशिकाएं अग्नाशय या पेनक्रियाज़ में उपस्थित होती है। अग्नाशय में कुछ कोशिकाओं का समूह होता है जिन्हें लैंगरहंस की द्वीपीकाए कहते हैं।

लैंगरहंस की द्वीपीकाए या आईलेट्स ऑफ लैंगरहंस अग्नाशय की अंतः स्रावी वाला भाग होती हैं जो हार्मोन का निर्माण और स्त्राव करती हैं। इन कोशिकाओं के समूह को सबसे पहले लैंगरहंस नामक वैज्ञानिक ने खोजा था।

इसलिए इसे लैंगरहंस की द्वीपीकाए या आईलेट्स ऑफ लैंगरहंस नाम दिया गया है।  

हालांकि हमारी अग्नाशय का अधिकतर पेनक्रिएटिक एकिनी (Pancreatic acini) कहलाता है। जो रचना और कार्य के आधार पर भाग बहि स्रावी होता है। 

यह भाग पेनक्रिएटिक एंज़ाइमों का निर्माण और स्त्राव करता है।

जबकि अग्नाशय का बहुत कम भाग एंडोक्राइन की तरह से कार्य करता है, इसे ही आईलेट्स ऑफ लैंगरहंस कहते हैं।

जो अलग-अलग कोशिकाओं से मिलकर बना होता है और हार्मोन का निर्माण करता है।

यहां पाई जाने वाली कोशिकाएं और उनसे निकलने वाले कुछ हार्मोन इस प्रकार है।

अल्फा कोशिकाएं (𝜶-cells secreted glucagon) ग्लूकागान हार्मोन का निर्माण करती हैं 

बीटा कोशिकाएं (𝜷-cells secreted insulin) इंसुलिन हार्मोन निकलता है

डेल्टा कोशिकाएं (𝜹-cells secreted somatostatin) सोमेटोस्टेटिन हार्मोन का निर्माण करती हैं।

पीपी कोशिकाएं(PP-cells secreted pancreatic polypeptide) यह पेनक्रिएटिक पॉलिपेप्टाइड का निर्माण करती हैं

how insulin work at cellular level

इंसुलिन की संरचना Structure of Insulin-

यह पॉलिपेप्टाइड या प्रोटीन हार्मोन है जो दो पॉलिपेप्टाइड चेन से मिलकर बना होता है।

जिन्हें अल्फा या ए पॉलिपेप्टाइड चेन और दूसरी बीटा या बी पॉलिपेप्टाइड चेन कहते हैं।

पूरी तरह से मेच्योर और तैयार (Mature & Functional Insulin) इंसुलिन में 51 अमीनो एसिड (51amino acids) होते हैं।

जिनमें से 21 अमीनो अम्ल अल्फा या ए पॉलिपेप्टाइड (𝜶 or A-polypeptide chain) चेन में, वही बचे हुए 30 अमीनो एसिड बीटा या बी पॉलिपेप्टाइड (𝜷 or B polypeptide chain) चेन में उपस्थित होते है।

अतः बीटा या बी पॉलिपेप्टाइड चेन बड़ी होती है। दोनों ही पॉलिपेप्टाइड चेन आपस में डाईसल्फाइड बंधों द्वारा जुड़ी होती है।

डाईसल्फाइड बांड सिसटीन (Cysteine) अमीनो अम्ल (सल्फर युक्त अमीनों अम्ल-Sulphur containing amino acid) के बीच बनते हैं।

अगर इंसुलिन में देखें तो कुल मिलाकर तीन डाईसल्फाइड होते हैं, हालांकि जो शुरुआती इंसुलिन बनती है, उसे प्रोइन्सुलिन (Proinsulin) कहते हैं।

जिसमें एक और सी-पॉलिपेप्टाइड चेन (C-polypeptide chain) मौजूद होती है, लेकिन जब इंसुलिन की प्रोसेसिंग होती है तो इस चेन को निकाल दिया जाता है।

इंसुलिन हार्मोन की संरचना के बारे में सबसे पहले वैज्ञानिक चार्ल्स बेस्ट और सर फ्रेडरिक बैटिंग (Charles Best & Sir Fredrick Banting) के जन्मदिवस के रूप में ने बताया था।

यह भी ध्यान देने वाली बात है सर फ्रेडरिक बैटिंग के जन्मदिवस को, हर साल 14 नवंबर का दिन विश्व मधुमेह दिवस (Global Diabetic Day) के रूप में मनाया जाता है।

इंसुलिन बनाने वाले जीन कहां होते हैं? Gene Location of Insulin-

इंसुलिन अग्नाशय की बीटा कोशिकाओं द्वारा बनाए जाते हैं, इनको बनाने वाली जीन भी इन्हीं कोशिकाओं की क्रोमोसोम संख्या 11 (gene located in chromosome number 11) पर उपस्थित होते हैं।

यहां आपको जानकर आश्चर्य होगा कि, इंसुलिन बनाने वाले जीन शरीर की हर एक कोशिका में (आरबीसी को छोड़कर) मौजूद होते हैं।

 लेकिन शरीर कि कोई भी कोशिका इंसुलिन नहीं बना पाती, दिमाग में यह सवाल तो ज़रूर आएगा आखिर क्यों? केवल अग्नाशय की बीटा कोशिकाएं ही इंसुलिन बना सकती हैं।

जबकि इसको बनाने वाली जीन शरीर की हर कोशिका में (आरबीसी को छोड़कर-Except RBC) पाए जाते हैं।

क्योंकि सारी कोशिकाओं में केंद्रक होगा और उस केंद्रक में 23 जोड़ी क्रोमोसोम उपस्थित होते हैं तो 11वां क्रोमोसोम भी होगा।

इस सवाल को यही सवाल के तौर पर ही छोड़ देते हैं किसी और पोस्ट में डिटेल से समझेंगे या अगर आपको पता हो तो हमें कमेंट कीजिए।

इंसुलिन के कार्य Function of Insulin-

इंसुलिन हमारे शरीर में रक़्त शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करती है।

जब भी हम कार्बोहाइड्रेट या ग्लूकोस युक्त भोजन खाते हैं तो बीटा कोशिकाएं रक़्त में इंसुलिन का स्त्राव शुरु कर देती है।

इंसुलिन शरीर की कोशिकाओं में ग्लूकोस के अवशोषण को बढ़ा देती है, जिससे रक्त में शर्करा की मात्रा नियंत्रित बनी रहती है।

अगर सामान्य अवस्था में देखा जाए तो, खाली पेट मतलब सुबह बासी मुंह (Fasting Plasma glucose) रक़्त में शर्करा की मात्रा रक़्त में 70-100dl और भोजन के दो घण्टे (Plasma glucose two hours after meals) बाद 100-140dl होती है।

अगर में उपरोक्त दी गई शर्करा की मात्रा में बहुत ज़्यादा बदलाव होता है, तो मधुमेह (Diabetes) होने का ख़तरा हो सकता है।

इंसुलिन मुख्य रूप से लीवर की कोशिकाओं या हिपैटोसाइट्स (Liver cells or Hepatocytes) वसा ऊतकों की कोशिकाओं (Adipose tissue cells or Adipocytes) में ग्लूकोस के अवशोषण और उनके इस्तेमाल को बढ़ाती है।

इंसुलिन ही हिपैटोसाइट्स और मसल कोशिकाओं में ग्लाइकोजेनेसिस (ग्लूकोस का ग्लाइकोजन में बदलाव) को भी बढ़ाती है। इसके अलावा यह लाइपोजेनेसिस को भी नियंत्रित करती है।

इस प्रकार से इंसुलिन को हम हाइपोग्लाइसेमिक कारक या फैक्टर भी कहते हैं, जो रक़्त में ग्लूकोज़ का होमियोस्टैसिस बनाए रखती है।

कैसे काम करती है इंसुलिन? How Insulin Work in Body?

क्योंकि इंसुलिन क्योंकि इंसुलिन लीवर कोशिकाओं और मांसपेशियों की कोशिकाओं में ग्लूकोस के अवशोषण को बढ़ाती है।

इसलिए इसकी टारगेट कोशिकाएं भी यही होती हैं। इन कोशिकाओं में इंसुलिन के लिए रिसेप्टर्स (Receptors) मौजूद होते हैं, और इन्हीं रिसेप्टर्स पर इंसुलिन आकर जुड़ती है।

information about insulin

इन रिसेप्टर्स को जीएलयूटी-4 (GLUT-4 glucose transporter) दिया जाता है।

यह रिसेप्टर्स इन कोशिकाओं की प्लाज़्मा झिल्ली (Plasma membrane) पर मौजूद होते हैं, और रासायनिक रूप से प्रोटीन के बने होते हैं।

जब इन रिसेप्टर्स पर इंसुलिन आकर जुड़ती है, तो इन कोशिकाओं की प्लाज़्मा झिल्ली में इस तरह का बदलाव होता है कि, वह ग्लूकोस के लिए अधिक पारगम्य (increase permeability) हो जाती हैं।

जिससे रक़्त में मौजूद ग्लूकोस तेज़ी से इनके अंदर प्रवेश करता है, फलस्वरूप रक़्त में ग्लूकोस की मात्रा नियंत्रित बनी रहती है।

इंसुलिन के लिए रिसेप्टर्स शरीर की दूसरी कोशिकाओं में भी मौजूद होते हैं जिनके नाम अलग-अलग होते हैं।

इंसुलिन की कमी से होने वाले रोगDisease related ti Insulin Deficiency-

जब शरीर में इंसुलिन हार्मोन की कमी या शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कोई संवेदना नहीं दिखाती तो रक्त में ग्लूकोस की मात्रा बढ़ जाती है।

जब यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो डायबिटीज या मधुमेह (Diabetes mellitus) होने की संभावना बढ़ जाती है। 

ऐसे व्यक्ति के रक़्त में शुगर की मात्रा सामान्य से अधिक हो जाती है। तो उन्हें बाहर से इंसुलिन खरीद कर लगानी पड़ती है।

आप मधुमेह के बारे में और ज्यादा जानकारी यहां पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

कैसे बनाई जाती है इंसुलिन? How to synthesize Recombinant Insulin?

शुरुआत में जो इंसुलिन मधुमेह के रोगियों को दी जाती थी वाह दूसरे जानवरों से निकाली गई इंसुलिन होती थी।

चूंकि यह मानव इंसुलिन न होने के कारण रोगियों के शरीर में जाने के बाद एलर्जी या दूसरी तरह के साइड इफेक्ट्स दिखाती थी।

इसलिए मानव निर्मित इंसुलिन के समान ही, बैक्टीरिया के अंदर इंसुलिन बनाई गई।

कृत्रिम इंसुलिन को हम रिकांबिनेन्ट इंसुलिन भी कहते हैं। जिसे जैव प्रौद्योगिकी या जेनेटिक इंजीनियरिंग (Biotechnology or Genetic Engineering) क्रियाविधि से सर्वप्रथम बनाया गया था।

यह कार्य पहले एक अमेरिकन कंपनी इली-लिली ने सन् 1983 (Eli Lilly an American company) में किया था।

सबसे पहले इंसुलिन बनाने वाले जीन को बीटा कोशिकाओं से अलग किया गया। फिर उसे एक वेक्टर की सहायता से क्लोन किया गया।

इसके बाद ई.कोलाई बैक्टीरिया (E.coli Bacterium) के अंदर प्रवेश कराया गया। जहां पर यह जीन सक्रिय होकर इंसुलिन की कोडिंग करने लगे और इंसुलिन का निर्माण शुरू हुआ।

how insulin processing take place

इस इंसुलिन को रिकांबिनेन्ट इंसुलिन या ह्यूम्युलिन (Recombinant or Humulin) नाम दिया गया।

इसके बारे में हम लोग विस्तार से चर्चा बायोटेक्नोलॉजी (Biotechnology or Genetic Engineering) के पोस्ट की सीरीज़ में करेंगे। 

आज के समय में बहुत सी फार्मास्यूटिकल या दवाओं की कंपनियों की इंसुलिन बाज़ार में उपलब्ध है। जो डॉक्टर के परामर्श के बाद ही इस्तेमाल करनी चाहिए।

अंत मेंConclusion

कुल मिला जुला कर हम कह सकते हैं कि, इंसुलिन हार्मोन ग्लूकोस या कार्बोहाइड्रेट के उपापचय (Regulates Metabolism of Carbohydrate or Glucose) को नियंत्रित करती है।

आशा है यह पोस्ट आपको अच्छा लगा होगा, हमने अपनी तरफ इंसुलिन हार्मोन (Insulin) पर लगभग पूरी जानकारी साझा करने का प्रयास किया है।

लेकिन फिर भी अगर कोई कमी या सुझाव आपको लगता है, तो उसे कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताएं। आपके किसी भी सुझाव को हम अपनी वेबसाइट में साझा करने का प्रयास करेंगे। 

अपना क़ीमती समय देने के लिए आपका बहुत धन्यवाद।। Thanks!!

उम्मीद है आपकी इंटरनेट यात्रा शुभ होगी!!

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