Heart & Its Function in Hindi।हृदय और उसके कार्य 

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हमारा हृदय और उसके कार्य 

अक्सर लोग कहते हैं, मैंने दिल से सोचा या उसके दिल में नफरत या मोहब्बत है।

तो क्या हमारे दिल सोचने और इसके अलावा मोहब्बत और नफरत करने का काम करता है, नहीं बल्कि यह सरासर गलत है,  कि दिल का कार्य मोहब्बत और नफरत है।

heart in hindi

हम सभी ने दिल पर कोई ना कोई गाने सुने होंगे।और जाने कितनी फिल्में इसके नाम पर बनी, और ग़ज़ल लिखी गई होंगी।

लेकिन सच में देखें तो दिल केवल रक़्त को पूरे शरीर में पंप करता है।

हृदय हमारे शरीर के उन अंगों में आता है जो बिना रुके, बिना थके, 24 घंटे, सातों दिन और हमारी पूरी ज़िंदगी तक कार्य करता है। 

मतलब जब तक शरीर में जान बाकी है, तब तक दिल भी काम करता रहेगा।

आज के इस पोस्ट में हम हृदय की संरचना, उसके कार्य और उससे संबंधित रोगों की बात करेंगे।

हृदय या दिल 

मनुष्य और दूसरे स्तनधारियों में जो हृदय होता है, उसमें चार कक्ष होते हैं। इसके अलावा चार कक्षीय हृदय, पक्षियों और क्रोकोडाइल में पाया जाता है। प्राणी जगत में हृदय कक्षों की संख्या के आधार पर विभिन्न प्रकार का होता है। जैसे कि-

मत्स्य वर्ग में दो कक्षीय हृदय होता है- एक आट्रिया या अलिंद और एक निलय या वेंट्रीकल 

उभयचर वर्ग में तीन कक्षीय हृदय होता है- दो आट्रिया या अलिंद और एक निलय या वेंट्रीकल 

सरीसृप वर्ग (क्रोकोडाइल को छोड़कर) में भी तीन कक्षीय हृदय होता है- दो आट्रिया या अलिंद और एक निलय या वेंट्रीकल 

क्रोकोडाइल, पक्षीय वर्ग और स्तनधारी वर्ग में चार कक्षीय हृदय होता है- दो आट्रिया या अलिंद और दो निलय या वेंट्रीकल 

हृदय की उत्पत्ति, स्थिति, आकार और साइज़(origin, position, shape and size of heart)

हृदय की उत्पत्ति मीज़ोडर्म (Mesodermal origin) से होती है। यह हमारे शरीर के ऊपरी भाग में दाहिनी ओर दोनों फेफड़ों के बीच उपस्थित होता है। वयस्कों में हृदय 12 सेंटीमीटर का (12cm) होता है।

heart structure in hindi
Structure of heart

हृदय का वज़न पुरुषों में 280-340 ग्राम (औसतन 300 ग्राम) और महिलाओं में 230-280 ग्राम (औसतन 250 ग्राम) ग्राम होता है।

हृदय की सुरक्षा(How Heart Protected)?

हृदय का आकार एक बंद मुट्ठी के समान होता है। हमारा हृदय दो स्तरों से घिरा होता है। इसे पेरिकार्डियम (Pericardium) कहते हैं। 

इन दोनों स्तरों के बीच पेरिकार्डियल द्रव्य (Pericardial fluid) भरा होता है। जो हृदय को बाहरी आघातों से और पेरिकार्डियम मेंब्रेन को आपस में चिपकने से रोकता है।

हृदय की दीवारों की रचना(structure of heart wall)?

दीवारें हृदय की दीवारें हैं तीन स्तरों की बनी होती हैं-

सबसे बाहरी एपिकार्डियम-यह मीज़ोथिलियम और संयोजी उत्तक की बनी होती है।

बीच की मीज़ोकार्डियम-यह मायोकार्डियम पेशीय  की बनी होती है।

सबसे अन्दर एडोंकार्डियम– यह एंडोथिलियम और संयोजी उत्तक की बनी होती है।

ह्रदय के कक्षों की संरचना (structure of heart chambers)

स्तनधारियों और मनुष्य में कुल 4 कक्ष पाए जाते हैं।

जिनमें दो ऊपरी छोटे कक्ष, जिन्हें आट्रिया (Atria) या अलिंद कहते हैं। और दो निचले बड़े कक्ष होते हैं जिन्हें वेंट्रीकल (Ventricle) या निलय  कहते हैं।

अलिंद की दीवारें पतली होती हैं। अलिंद रक़्त को शरीर के विभिन्न भागों से ग्रहण करता है।

दाएं आट्रिया में सुपीरियर ओर इनफीरियर वेना कावा के द्वारा डीऑक्सीजनेटेड रक़्त और बाय अलिंद में पलमोनरी वेन के द्वारा ऑक्सिजनेटेड रक़्त आता है।

वेंट्रीकल की दीवारें मोटी होती हैं, क्योंकि यह रक़्त को दबाव के साथ पूरे शरीर में पंप करता है।

दाहिना वेंट्रीकल डीऑक्सीजनेटेड रक्त को पलमोनरी आर्टरी द्वारा फेफड़ों को भेजता है। जहां पर्याप्त ऑक्सीजन आने के बाद रक़्त ऑक्सीजन युक्त (oxygenated) हो जाता है।

जिसे बाएं वेंट्रीकल से एओरटा (शरीर की सबसे बड़ी आर्टरी-Aorta Largest artery) द्वारा पूरे शरीर को ऑक्सीजन युक्त रक़्त पहुंचता है।

ह्रदय के चारों कक्ष कैसे एक दूसरे से अलग-अलग होते हैं(How all chambers of Heart Separated)?

ह्रदय के चारों कक्ष एक दूसरे से सेप्टम (septum) द्वारा अलग-अलग होते हैं।

यह सेप्टम तीन प्रकार के होते हैं-

इंटर आट्रियल सेप्टम (inter atrial septum)-यह दाहिने और बाएं आट्रिया को अलग करता है।

इंटरवेंट्रिकुलर सेप्टम (inter ventricular septum)-यह दोनों वेंट्रीकल को अलग करता है।

एट्रियोवेंट्रिकुलर सेप्टम (inter atrio-ventricular septum)-यह आट्रिया और वेंट्रीकल के बीच उपस्थित होता है।

हृदय के वाल्व या कपाट क्या होते हैं (what are the heart valves)?

वाल्व या कपाट एक प्रकार के रंध्र (pore) होते हैं। जिनसे रक़्त हृदय के एक कक्ष से दूसरे कक्ष और फिर इन कक्षों से रक़्त वाहिनियों में जाता है।

इन वाल्व की खासियत यह होती है कि, यह रक़्त को जाने तो देते हैं, लेकिन वापस नहीं आने देते है। मतलब यह केवल एक तरफ खुलने वाले दरवाज़े की तरह काम करते हैं।

कौन-कौन से वाल्व होते हैं? (different types of valve)

आट्रिया और वेंट्रीकल के बीच उपस्थित होते हैं। इसके अलावा जो भी रक्त वाहिनीयां दिल से बाहर निकल रही हैं, वहां पर भी कपाट उपस्थित होते हैं। 

बाइकस्पिड वाल्व या मिट्रल वाल्व (bicuspid or mitral valve)-

यह दाएं आट्रिया और वेंट्रीकल के बीच उपस्थित होता है 

ट्राईकस्पिड वाल्व या त्रीवलनी कपाट (tricuspid valve)-

यह बाय अलिंद और बाएं हिले के बीच उपस्थित होता है 

सेमील्युनर वाल्व (semilunar valve)-

यह अर्धचंद्राकार आकार के कपाट होते हैं। जोकि एओरटा के निकलने वाले स्थान पर मौजूद होते हैं, जैसे कि एओरटिक वाल्व

heart chambers
how heart chambers separated

डबल सरकुलेशन क्या है? (What is double circulation)?

हृदय का दाहिना भाग रक़्त को ऑक्सीजन के लिए फेफड़ों में पंप करता है। इसे पलमोनरी सरकुलेशन (pulmonary circulation) कहते हैं।

वही ह्रदय का बायां भाग रक़्त को शरीर के सभी भागों में पंप करता है। इसे सिस्टमिक सरकुलेशन (systemic circulation) कहते हैं।

परिसंचरण से संबंधित रोग (disorders related to circulation)-

यहां हम हृदय से संबंधित कुछ सामान्य विकारों की बात करेंगे।

आगे आने वाली पोस्टों में हम हृदय संबंधित बीमारियों के विस्तृत चर्चा करेंगे।

हाई ब्लड प्रेशर (hypertension or high blood pressure)-

जब रक़्त का दाब अपनी सामान्य अवस्था से अधिक हो जाता है, और यदि यह उच्च दाब लगातार बना रहता है। तो यह हाई ब्लड प्रेशर का इशारा है।

अगर यह अवस्था लगातार बनी रहती है, ह्रदय से संबंधित बीमारियां होने का खतरा रहता है।

इसके साथ ही हाई ब्लड प्रेशर हमारे ब्रेन (Nervous) और किडनी (kidneys) जैसे महत्वपूर्ण अंगों को भी प्रभावित करता है।

हृद धमनी रोग (coronary artery disease)-

इसे स्क्लोरोसिस के नाम से जाना जाता है। इस बीमारी में हृदय को खून सप्लाई करने वाली रक़्त वाहिनीयां (Blood vessels) प्रभावित हो जाती है। क्योंकि इन रक़्त वाहिनियों (blood vessels) के अंदर वसा, कैल्शियम और अन्य फाइबर टिशु (deposition of  calcium, fibres tissues and fat) जमा हो जाते हैं।

जिससे इनकी कैविटी की चौड़ाई कम (cavity become narrow) हो जाती है, फलस्वरूप रक़्त सही प्रकार से प्रवाहित नहीं हो पाता।

एंजाइना पेक्टोरिस (Angina Pectoris)-

इस बीमारी में हृदय पेशियों को सही प्रकार से ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं हो पाती। जिससे सीने में तेज दर्द होता है, इसी को एंजाइना कहते हैं।

यह किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन मध्यावस्था और बुढ़ापे में, यह दिक्कत अधिकतर होने की संभावना होती है।

इस बीमारी का कारण रक़्त के बहाव के प्रभावित होने से होता है।

हार्ट फेल (heart failure)-

जब दिल शरीर के विभिन्न अंगों को ज़रूरत के मुताबिक रक़्त की आपूर्ति नहीं कर पाता, तो यह बीमारी हो जाती है।

इसका कारण, हृदय की पेशियों को अचानक से रक़्त की आपूर्ति कम हो जाना या हृदय पेशियों को कोई क्षति पहुंचना है।

अंत में(Conclusion)-

हृदय प्रकृति का दिया हुआ अनमोल तोहफा है।

हमारा हृदय सोचने, मोहब्बत करने या नफरत करने का काम नहीं करता है। बल्कि यह शरीर में रक़्त को पंप करता है।

क्योंकि रक़्त के द्वारा ही हर प्रकार के भोज्य पदार्थ, हार्मोन, एंटीबॉडी और अपशिष्ट पदार्थों का गमन होता है।

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