क्यों जैव विविधता समाप्त हो रही है।क्या कुछ वर्षो में जैव विविधता ख़त्म हो जाएगी

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क्यों जैव विविधता का नुकसान हो रहा है?(Why Biodiversity Loss)?

आखिर हम किस बात की तैयारी कर रहे हैं क्या हम पृथ्वी और उस पर मौजूद दूसरे जीवो को जब तक पूरी तरह से ख़त्म नहीं कर देंगे तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे या जब तक कि हमारी लालच और ज़रूरत पूरी नहीं होगी।

या उस समय तक पृथ्वी के संसाधनों का इस्तेमाल करेंगे जब तक या पृथ्वी रहने लायक ना रहे।

अगर सही तरह से देखा जाए तो जैव विविधता और पृथ्वी को सबसे ज्यादा हानि पहुंचाने का कार्य इंसानों द्वारा किया गया है।

यह इंसान ही है जिन्होंने पृथ्वी के हर क्षेत्र में मनमानी की है और संसाधनों का अंधाधुंध अपने इच्छा अनुसार इस्तेमाल किया है।

क्योंकि मनुष्य की ज़रूरत अब लालच में बदल गई है अगर ज़रूरत से ज़्यादा पृथ्वी के किसी भी संसाधनों का चाहे वह जंतु हों,या पेड़ पौधे हों, या दूसरे संसाधन हों।

अगर उनका इस्तेमाल बिना ज़रूरत के और ज़रूरत से ज़्यादा किया जाएगा तो वह पूरी तरह से बर्बाद हो जाएंगे और धीरे-धीरे इस पृथ्वी से ख़त्म हो जाएंगे।

यही वजह है कि पिछले कुछ समय में जैव विविधता का बहुत बुरी तरह से इस्तेमाल हुआ है और यह धीरे- धीरे समाप्त हो रही है।

यह भी हो सकता है कि आने वाले समय में बहुत सी ऐसी प्रजातियां जिन्हें हम आज देख रहे हैं वह ख़त्म हो जाए या विलुप्ति की कगार पर पहुंच जाएं।

वह कौन सी प्रजातियां हैं जो विलुप्त हो चुकी है या विलुप्ति की कगार पर हैं?(Which Species of Plant & Animals are ready to Extinction)

मानव द्वारा किए गए क्रियाकलापों की बात की जाए तो इसमें से कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं-

मानव ने प्रशांत उष्णकटिबंधीय द्वीपों पर आवासी बस्तियां बनाई जिससे वहां की मूल पक्षियों (Native or Local Birds Species) की  2000 से अधिक जातियां विलुप्त हो गई।

आई.यू.सी.एन कि लाल सूची (Red List) के अनुसार जोकि 2004 के साक्ष्यों पर आधारित हैं इसमें कहा गया है कि पिछले 500 वर्षों में 784 जातियां जीवो की विलुप्त हो गई है।

इनमें से 338 जातियां कशेरूकी प्राणियों(Vertebrates Animals Species) की हैं, 359 जातियां अकशेरुकी प्राणियों (Invertebrates Animals Species)की हैं,और 87 जातियां पेड़ पौधों की हैं।

हमें यह नहीं पता इन जातियों के विलुप्त होने से हमारे पृथ्वी पर या जिस भी पारिस्थितिकी तंत्र में यह जीव उपस्थिति थे उस पर क्या प्रभाव पड़ा होगा क्योंकि हम तो सिर्फ विनाश की ओर अग्रसर हैं।

वही इस समय विलुप्त जातियों की बात करें तो मारीशस की डोडो जो बत्तख के समान पक्षी थी, अफ्रीका की क्वैगा, ऑस्ट्रेलिया की थाइलोसीन, रूस की स्टेलर समुद्री गाय और बाली, जावा तथा कैस्पियन की बाघों की तीन उपजातियां भी शामिल है।

जीवो के विलुप्तिकरण की दर(Rate of Extinction)-

पिछले 20 वर्षों में लगभग 27 जातियां विलुप्त हो गई हैं अगर हम इन आंकड़ों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करें तो यह हमें समझ में आएगा कि यह जातियों का विलुप्तिकरण असमान नहीं है।

बल्कि उभयचरों समूह की जातियां बहुत तेज़ी से विलुप्त हुई हैं इस भयानक स्थिति के संदर्भ में यह भी शामिल किया जाना चाहिए की विश्व की 15000 से भी अधिक जीवों की जातियां इस समय विलुप्ति के कगार पर हैं।

अगर देखा जाए तो वर्तमान समय में 12% पक्षियों की जातियां, 23% स्तनधारियों की जातियां, 32% उभयचरों की जातियां और 31% आवृत्तबीजी पेड़ों की जातियां विलुप्ति के कगार पर है।

इस दुनिया में लगभग 5 बार जातियों के व्यापक विलुप्तिकरण की घटना हो चुकी है।

लेकिन अब जो छटा विलोपन चल रहा है वह पिछली 5 घटनाओं से बहुत ज्यादा भयानक है अंतर केवल दर में है।

main causes of Biodiversity loss

क्योंकि मानव द्वारा जो क्रियाकलाप हो रहे हैं उससे यह विलुप्तिकरण की प्रक्रिया 100 से 1000 गुना अधिक तेज़ी से हो रही है।

वैज्ञानिकों का दावा है कि विलुप्ति क्रम ऐसे ही जारी रही तो अगले 100 वर्षों में इस दुनिया में इस दुनिया की आधी जातियां विलुप्त हो जाएंगी।

अगर हम जैव विविधता की नुकसान के कारण को ढूंढें तो इसमें चार मुख्य कारण नजर आएंगे जोकि निम्नलिखित हैं।

जैव विविधता के नुकसान से पृथ्वी का परिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह से अनियमित हो गया है जिसका कारण मानव क्रियाकलाप है।

हम दिन सुनते हैं की कहीं जंगलों में बहुत ज़्यादा आग लग गई है या कहीं अनियमित वर्षा हो रही है या कहीं बहुत ज्यादा बाढ़ आ रही है, तो कहीं सूखा पड़ रहा है।

साथ ही साथ वैज्ञानिक रोज़ ही ग्लोबल वार्मिंग के बारे में दुनिया को बता रहे हैं इन सब घटनाओं का कहीं ना कहीं सीधे तौर पर संबंध जैव विविधता के विनाश से ही है।

जैव विविधता क्षति के मुख्य कारण(Main reason of Biodiversity Loss)-

इन्हें हम दो मुख्य भागों में बांट सकते हैं

पहले प्राकृतिक कारण-इसमें जंगलों में लगने वाली आग,भूस्खलन बाढ़ का आना और अन्य प्राकृतिक आपदाएं हैं।

जिनसे जैव विविधता का नुकसान होता है किंतु यह प्राकृतिक और अस्थाई प्रक्रिया है इसलिए पुनः जैव विविधता उसी तेजी से उस क्षेत्र में विकसित हो जाती है।

दूसरे अप्राकृतिक या मानव निर्मित कारण-इनमें से मानव निर्मित कारण सबसे मुख्य वजह है जैव विविधता के विनाश की।

यहां अधिकतर मानव द्वारा किए गए क्रियाकलाप हैं जोकि स्थाई हैं और इनकी वजह से जैव विविधता का पुनः विकास बहुत धीमे होगा या नहीं होगा और प्रजातियां विलुप्त हो जाएगी।

कुछ मुख्य क्रियाकलापों की चर्चा हम नीचे कर रहे हैं-

1-जीवो के आवासीय क्षेत्र की क्षति और उनका विखंडन(Fragmentation and Loss of habitats of Wild Animals)-

अगर केवल वर्षा वन की बात की जाए तो यह एक समय में पृथ्वी के कुल 14% क्षेत्र में फैले हुए थे लेकिन अभी आ 6% से अधिक क्षेत्र में नहीं है।

इतना जोड़ घटाना तो हम सभी को आता है कि कितना बड़ा नुकसान हुआ है और अभी भी यह इतनी तेज़ी से नष्ट किए जा रहे हैं कि जब आप यह आर्टिकल पढ़ रहे होंगे तब तक हजारों हेक्टेयर वर्षा वन समाप्त किए जा चुके होंगे।

पृथ्वी का फेफड़ा(Lungs of Planet) अमेज़न वर्षावन(Amazon Rain Forest) यह इतना विशाल वर्षावन है किस इसे ‘पृथ्वी का फेफड़ा’ के नाम से भी जाना जाता है इस वन में हज़ारों-लाखों जीवों की जातियां निवास करती हैं।

यहां के वर्षावन को सोयाबीन(Soyabean) की खेती और जानवरों के चरने के लिए चरागाह बनाने के लिए काटकर साफ किया गया किया जा रहा है।

इससे आप समझ सकते हैं कि कितनी अधिक प्रजातियों का विलुप्तिकरण होगा।

Man Made Causes of Biodiversity Loss

2.बहुत ज्यादा इस्तेमाल(Over use of Natural Resources)-

इंसान ने हमेशा पृथ्वी के संसाधनों का इस्तेमाल करता आया है और अपने जीवन के लिए उसी पर निर्भर रहता है।

लेकिन जब ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल प्राकृतिक संसाधनों का शुरू हो जाता है तब प्रकृति में हानिकारक बदलाव होता है।

मानव द्वारा बहुत ज़्यादा संसाधनों के इस्तेमाल से पिछले सैकड़ों वर्षों में बहुत सी जातियां समाप्त हो गई यह विलुप्ति की कगार पर है 

प्राणियों का अंधाधुंध शिकार भी इसकी बहुत बड़ी वजह है साथ ही साथ पेड़ों की कटाई की वजह से बहुत सी प्रजातियों के पेड़ विलुप्ति की कगार पर है।

3.बाहरी जातियों का प्रवेश(Introduction of Exotic Species)-

किसी भी परिस्थितिकी तंत्र में जब कोई बाहरी जीव की प्रजाति जानकर या अनजाने में प्रवेश कराई जाती है तब उनमें से हो सकता है कुछ आक्रामक हो।

यह आक्रामक प्रजातियां, स्थानीय जातियों की विलुप्ति का कारण या उनकी कमी का कारण बन जाती हैं।

जैसे कि जब नील नदी की मछली नाइल पर्च को पूर्वी अफ्रीका की विक्टोरिया झील में प्रवेश कराया गया तब झील में रहने वाली स्थानीय मछलियां जिनको सिचलिड के नाम से भी जाना जाता है उनकी 200 से अधिक जातियां खत्म हो गई।

इसी प्रकार से वाटर हायसिंथ(टेरर ऑफ बंगाल) गाजर घास यह सभी विदेशी जातियां हैं।

4.एक साथ विलुप्तता(Coextinction of Species)-

इसे हम सह विलुप्तता भी कह सकते हैं जब कोई एक जाति विलुप्त होती है या विलुप्ति की कगार पर होती है तो उस पर निर्भर दूसरी जाति भी विलुप्त हो सकती है।

जैसे कि अगर हम पुष्पीय पौधों की बात करें तो उनको अपने परागण के लिए मधुमक्खियों पर या दूसरे कीड़ों पर निर्भर रहना पड़ता है।

अगर हम मधुमक्खियों को हटा दें तो धीरे-धीरे पुष्पीय पौधों का विकास और उनकी प्रजातियां भी समाप्त हो जाएंगी।

5-बढ़ती आबादी और शहरीकरण(Increase Population and Urbanization)-

विभिन्न प्रजातियों के व्यक्ति के लिए विलुप्ति के लिए यह भी एक मुख्य कारण है जैसे-जैसे मनुष्य की जनसंख्या बढ़ती जाएगी उसे नए आवास और संसाधनों की आवश्यकता पड़ेगी।

इसके लिए मनुष्य सीधे तौर पर उन क्षेत्रों में प्रवेश करेगा जहां पर जीवो की विभिन्न प्रजातियां पाई जाती हैं।

इसी कारण से हम आए दिन सुनते हैं कि किसी गांव में यह किसी शहर में कभी कोई तेंदुए का आक्रमण होता है या किसी और जंगली जानवर का आक्रमण होता है।

कभी-कभी लोग अपने मवेशियों को बचाने के लिए भी इन जंगली जानवरों पर आक्रमण करते हैं और उन्हें मार देते हैं।

8.जानवरों का ग़ैर क़ानूनी शिकार

हम सभी जानते हैं जंगली जानवरों की संख्या में कमी का मुख्य कारण शिकार भी है।

हालांकि कि इसमें अब काफी ज़्यादा कमी आई है लेकिन छिपे चोरी अभी भी जंगली जानवरों का शिकार होता है।

7.बढ़ता प्रदूषण

इसकी वजह से भी विभिन्न प्रजातियां पर बहुत ज़्यादा प्रभाव पड़ा है और उनके आवासीय क्षेत्रों के साथ ही साथ उनकी जातियां धीरे धीरे ख़त्म हो रहे हैं।

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