वह घटना जिसमें जीन  इनहेरिटेंस के दौरान  अपने स्थान में कोई  परिवर्तन नहीं करते हैं,  लिंकेज कहलाता है।

लिंकेज

मतलब जीन क्रोमोसोम में उसी पोजीशन पर पाए जाएगे जिस कंडीशन और जगह पर वह पेरेंट्स के क्रोमोसोम (प्रथम पीढ़ी) में पाए जाते हैं।

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इसी कंडीशन को सहलग्नता या लिंकेज (Linkage) और इस तरह के genes को लिंग्ड जीन (Linked gene) कहते हैं।

अतः लिंकेज के अनुसार जीन जब एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में ट्रांसफर होते हैं, तो इनके स्थान में किसी प्रकार का बदलाव नहीं होता है।

और Gene उसी स्थान पर उपस्थित होंगे, जिस स्थान पर वह अभिभावक (पेरेंट्स) के क्रोमोसोम  में  उसी sequence में उपस्थित थे।

लिंकेज (सहलग्नता) के बारे में सबसे पहले सुटन और बोवेरी (concept was given by Sutton & Boveri:1902-03) ने बात की थी।

लेकिन लिंकेज को एक्सपेरिमेंटली प्रूफ़ टी.एच.मार्गन (1910) ने किया था, जब वह ड्रोसोफिला पर स्टडी कर रहे थे।

टी.एच.मार्गन ने अपनी स्टडी के दौरान देखा कि, जीन क्रोमोसोम में फिजिकल रूप से एक दुसरे से जुड़े होते हैं।

अगर दो जीन के बीच की दूरी अधिक (distance between two genes is more) होगी तब लिंकेज नहीं होगा और नए संयोजन बनेगें।

वही जब दो जीन के बीच की दूरी काम होने पर लिंकेज होगा और नए कॉम्बिनेशन नहीं बनेगें।